Saturday, October 09, 2010

A Dialogue Between Hindu, Muslim,Christian and Jain - 'इरफ़ान' मिल जाये, मार्ग मिल जाय तो इन्सान का जन्म सफल होजाता है, - Ejaz

@ राकेश लाल जी !
आप ने पहले लिखा था कि:-
मसीहा बिचवई है:-
सूरेःमरियमः 1967-70 आयत मे कुरान स्वयं कहती है या गवाही देती है कि हर एक मुसलमान और जिन्न और गुनहगार जहन्नम मे झोंका जायेगा और अल्लाह दोजख मे से धीरे धीरे उनके कामों के अनुसार निकालेगा और जिन्नो को और लोंगों को नरक मे घुटने के बल डालेगा। कुरान स्वयं बताती है और कहती है कि सब को नरक में जाना है

अब आप ने कुरआन खोल कर देखा तो आपको सूरए मरियम में यह आयात ही नहीं मिली इसीलिए अब आप यह कहने  पर मजबूर हैं कि:
सूरए मरियम
और तुममे से कोई ऐसा नहीं जो जहन्नुम पर से होकर गुज़रे (क्योंकि पुल सिरात उसी पर है) ये तुम्हारे परवरदिगार पर हेतेमी और लाज़मी (वायदा) है
(71 )
कमेन्ट - जहन्नम के ऊपर से गुज़रने का मतलब "गुज़रना" होता है, जहन्नम में डाला जाना नहीं होता
आप ने कहा कि :
खुदावन्द यीशू मसीह की महानता
कुरान मजीद का अध्ययन करने से यह पता लगता है कि प्रभू यीशू मसीह बहुत महान
हैं।
कमेन्ट- यहाँ आप ने साफ़ अल्फाज़ में खुदा के नबी हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को खुदा कहा है फिर अपने कहे हुए से पीछे क्यों हट रहे हैं मिस्टर?
बेशक हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम महान हैं और उन्हें कभी शैतान ने नहीं छुआ कुरआन यही बताता है , उसके बावजूद भी आप कुरआन को और उसके नियमों को क्यों नहीं मानते? इंजील की उस मिलावटी बात को सच क्यों मानते हो? जिसमें कहा गया है " फिर शैतान यीशु को एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर ले गया मत्ती (4 ,8 ) हमें बताया गया है कि शैतान तो उस इलाके से भी भाग जाता है जहाँ तक मसीह की नज़र पहुँचती है फिर यह कैसे संभव है कि शैतान मसीह को कहीं ले जाय और मसीह शैतान के पीछे- पीछे चले जाएँ ?
आपने लिखा है कि " दुनिया में बहुत सारे ईश्वर हैं"
कमेन्ट- कृपया इसके समर्थन में आप कुरआन या इंजील में से प्रमाण दीजिये, अगर आपने इन दोनों को या इन दोनों में से किसी एक को भी पढ़ा हो तो ?
आप ने दावा किया, अब आपको दलील भी देनी पड़ेगी। आपको बताना पड़ेगा जो आपसे पूछा जायगा, आपसे पूछा गया है कि
1-आप की बाइबिल में किताबों की संख्या रोमन केथोलिक की बाइबिल से कम हैं या बराबर ?
2- क्या आप " ओरिजिनल सिन" में विश्वास रखते हैं और मासूम बच्चों को पाप से जन्मजात तौर पर ही कलंकित मानते हैं.
 
आप बात को गोलमोल मत कीजिये सीधे -सीधे पिछली पोस्ट्स पर उठाये गए सवालों के जवाब दीजिये, आपसे कोई नाराज़ है ही आपको माफ़ी मांगने की ही ज़रुरत है, हम हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को प्यार करते हैं और उनसे प्यार करने वाले आप जैसे लोगों से भी प्यार करते हैं, आप जो कुछ कहना चाहें हम सुनने के लिए तैयार हैं लेकिन हमारे सवालों का आपको सटीक उत्तर देना होगा
धर्म और दर्शन में मूल अंतर
@ सुज्ञ जी !
दर्शन रचने वाले आदमी की द्रष्टि और ज्ञान सिमित होता है यह दार्शनिक केवल अपनी या अपने सिमित अनुयायियों के लिए ही चिंतन कर सकते हैं सारे जगत के पालन की चिंता इनका विषय नहीं होती क्योंकि ये सारे जगत के पालनहार नहीं होते जो सारे जगत का पालनहार है भरण पोषण का 'मार्ग' सबको सदा से वही दिखता आया है, वेद, बाइबिल और कुरआन देख लीजिये. आपको मानवजाती का मेन्यू मिल जायेगा ।
2- सत्य एक ही होता है लेकिन औरत मर्द बच्चा बूढ़ा और बीमार हरेक उसका पालन अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही करता है पहाड़ मैदान, टापू और रेगिस्तान की भौगोलिक दशाओं का भी मानव पर प्रभाव पड़ता है इसीलिए सत्य के पालन में इनसे भी बाधा और सुविधा पैदा होती रहती है सर्दी गर्मी और बरसात हर एक  मौसम में आदमी का आचरण बदलता रहता है इससे पता चलता है कि अच्छा उपदेशक सत्य का उपदेश करते हुए संबोधित व्यक्ति की मानसिक और भौगोलिक परिस्तिथियों पूरा ध्यान रखता है. जो इन्हें नज़रअंदाज़ करता है वह लोगों को खामखाँ परेशान करता है
'इरफ़ान' मिल जाये, मार्ग मिल जाय तो इन्सान का जन्म सफल होजाता है,
@ सफत आलम साहब !
अस्सलाम अलैकुम , मैं आपकी समीक्षा को भी उतने ही चाव से पढ़ता हूँ जितना कि किसी सार्थक लेख को. इसीलिए आप नित्य टिपण्णी देने कि मेहेबानी करें ताकि हमें एक बावकार और बशिआर आदमी से रूहानी गिज़ा रोज़ाना मिलती रहे । 'इरफ़ान' मिल जाये, मार्ग मिल जाये तो इन्सान का जन्म सफ़ल होजाता है, हमें नेक बात बताइए सबको एक बनाइये, रब की तरफ बढाइये, आपसे यही दरख्वास्त है  

11 टिप्पणियाँ:

महफूज़ अली said...

भाई...Between नहीं होगा.... AMONG होगा.... प्लीज़ सही कर लीजिये...

Ejaz Ul Haq said...

जनाब राकेश लाल जी आपका हार्दिक स्वागत है मेरे ब्लॉग प्रेम संदेस पर आप यहाँ तशरीफ़ लाइए और इसाई मान्यताओं के बारे में सब को बताइए कि वे मानवजाति को 'मूल पाप' से मुक्ति कैसे देती हैं ?

Ejaz Ul Haq said...

@ महफूज़ भाई !
आपने तो कभी लोगों को कलमे की दावत Between लिख कर भी न दी, हमें AMONG लिखने की सीख दे रहे हो ?
लिखो Between से या AMONG से
जो भी लिखो लिखो उमंग से ।
१ यह कबीर का देश है यहाँ शब्द और मात्राएँ अहमियत नहीं रखतीं, यहाँ ' सार्त्तत्व ' की अहमियत है. वैसे आप काफी सुन्दर हैं लेकिन सत्य आपसे भी ज्यादा सुन्दर है अगर आप भी सत्य का प्रचार करें तो आपकी सुन्दरता में चार चाँद लग जायेंगे टिपण्णी के लिए धन्यवाद।
२ एक बार आपने डा. अनवर जमाल साहब को भी स्वर,वयंजन का भेद समझाया था लेकिन आपने शिर्क और तौहीद का भेद ब्लॉग जगत को न तब समझाया था और न ही आज समझाया क्यों?
३ हाथ बढाओ साथ में आओ
सत्य का सार सबको बताओ
नहीं बताते तो कारण बताओ ?

Anwar Ahmad said...

@ महफूज़ अली लखनवी !
जितना बन पाया कर दिया एजाज़ भाई ने, अब Among से लिखने का तकाजा है आपसे । मेरे ब्लॉग पर आकर देख लीजिये वहां among मिलेगा न Between नेक बात से भरपूर और ग़लती से clean ।

सुज्ञ said...

एज़ाज साहब,
@दर्शन रचने वाले आदमी की द्रष्टि और ज्ञान सिमित होता है यह दार्शनिक केवल अपनी या अपने सिमित अनुयायियों के लिए ही चिंतन कर सकते हैं सारे जगत के पालन की चिंता इनका विषय नहीं होती क्योंकि ये सारे जगत के पालनहार नहीं होते जो सारे जगत का पालनहार है भरण पोषण का 'मार्ग' सबको सदा से वही दिखता आया है, वेद, बाइबिल और कुरआन देख लीजिये. आपको मानवजाती का मेन्यू मिल जायेगा ।

-धर्म और दर्शन की व्याख्या के लिये धन्यवाद;
लेकिन हमारी चर्चा धर्म के परीपेक्ष में थी, और मेरे दर्शन कहने का तात्पर्य भी धर्म से ही था।
मैं तो वेद, बाइबिल और कुरआन का ज्ञाता नहिं हूं, यह अन्तिम मानवजाति के तिनों ग्रंथ से मेनू आप प्रस्तूत कर देते तो ज्ञानार्जन हो जाता।
सम्पूर्ण जगत के भविष्यकालिन आहार के मेनू में वो क्या लिखते है?
@2- सत्य एक ही होता है लेकिन औरत मर्द बच्चा बूढ़ा और बीमार हरेक उसका पालन अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही करता है पहाड़ मैदान, टापू और रेगिस्तान की भौगोलिक दशाओं का भी मानव पर प्रभाव पड़ता है इसीलिए सत्य के पालन में इनसे भी बाधा और सुविधा पैदा होती रहती है सर्दी गर्मी और बरसात हर एक मौसम में आदमी का आचरण बदलता रहता है इससे पता चलता है कि अच्छा उपदेशक सत्य का उपदेश करते हुए संबोधित व्यक्ति की मानसिक और भौगोलिक परिस्तिथियों पूरा ध्यान रखता है. जो इन्हें नज़रअंदाज़ करता है वह लोगों को खामखाँ परेशान करता है ।

-सत्य की मनमर्ज़ी विश्लेषण के लिये धन्यवाद;
"सत्य एक ही होता है" के क्या मायने होते है, इस वाक्य का वास्त्विक अर्थ क्या है,भावार्थ क्या है?
कृपया………
अन्यथा ऐसा सत्य आपको मुबारक़!

Anwar Ahmad said...

nice post

@ कहाँ रह गए राकेश लाल जी ?
क्या सारा मैटर कल ही पेस्ट कर डाला ? अब इन सवालों के जवाब कौन देगा ? आपका डाक पता और फोन नंबर क्या है? मेहरबानी करके ज़रूर बताएं

@ महक जी !
महक जी के विचार और प्रयास प्राय: सार्थक हैं, चर्चा की सफलता के लिए सभी बधाई के हक़दार हैं । कभी समय मिले तो हापुड़ तशरीफ़ लायें ।

सुज्ञ said...

चर्चा को पूरी यहां देखनी चाहिए
http://vedquran.blogspot.com/2010/10/dialogue-with-mr-mahak-goyal-and-other.html

S.M.MAsum said...

मकड़े की चाल देखें यहाँ
धर्म का हाल यहाँ देखें

Ejaz Ul Haq said...

@Ravindra ji !
भारत में बनेगा, रावण का भव्य मंदिर ?
1- अनिल कौशिक कहते हैं कि कि रावण की अच्छाइयों को समाज के सामने लाया ही नहीं गया। रावण प्रकांड पंडित और महान शिव भक्त था। वह अलौकिक शक्तियों का स्वामी भी था। उसकी मौत के समय खुद भगवान राम ने लक्ष्मण को उससे शिक्षा लेने के लिए भेजा था.
2- रावण मंदिर समिति के अध्यक्ष अनिल कौशिक ने कहा कि अब रावण के गुणों को लोगों के बीच लाया जाएगा। इस काम के लिए रावण की ससुराल मेरठ को चुना है। मय नामक दानव के नाम पर पहले इस जगह का नाम मयराष्ट्र था। मय की पुत्री मंदोदरी से रावण का विवाह हुआ था। मेरठ जिले की सरधना तहसील में भव्य रावण मंदिर का निर्माण करने के लिए भूमि पूजन किया जा चुका है।

Dr. Ayaz Ahmad said...

अच्छी पोस्ट

PARAM ARYA said...

९९- जो अद्वैत सत्य ईश्वर है.- यो० प० १७, आ० ३
( समीक्षक ) जब अद्वैत एक ईश्वर है तो ईसाईयों का तीन कहना सर्वथा मिथ्या है . ॥ ९९ ॥
इसी प्रकार बहुत ठिकाने इंजील में अन्यथा बातें भरी हैं. सत्यार्थ प्रकाश पृष्ट ४१४, १३वां समुल्लास
परम विचार - यह देखो ऋषि का चमत्कार. इसे कहते हैं गागर में सागर. यह थोड़े से शब्द तेरी पूरी पोस्ट पे भारी हैं.
पादरी तूने क्या चखा है यह तेरे उत्तर से स्पष्ट हो जायेगा. तेरे पे ज्ञान की आत्मा उतरती हो तो दे इसका जवाब.

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